धनतेरस की पूजा छोटी, सरल और संध्या में होती है। परिवार लक्ष्मी, कुबेर और धन्वंतरि का पूजन करता है, यम के लिए द्वार पर दीपक जलाता है और घर में कुछ नया लाता है। यहाँ अपनाने के लिए एक स्पष्ट विधि है। पृष्ठभूमि और कथाओं के लिए हमारी गाइड धनतेरस, अर्थ और परंपराएँ पढ़ें।
मुख्य बातें
- पूजा संध्या में, प्रदोष काल में, तब होती है जब त्रयोदशी विद्यमान हो। अपने शहर का पंचांग देखें।
- गणेश, लक्ष्मी, कुबेर और धन्वंतरि का पूजन करें। सोना, चाँदी, सिक्के और बर्तन देवताओं के सामने रखे जाते हैं।
- सूर्यास्त के बाद यम के लिए द्वार पर दक्षिण मुख दीपक जलाएँ।
- 30 से 45 मिनट की सरल पूजा पर्याप्त है।
कब करें
धनतेरस की पूजा संध्या में, सूर्यास्त के तुरंत बाद आरंभ होने वाले प्रदोष काल में, उस दिन होती है जब उस समय त्रयोदशी तिथि विद्यमान हो। खरीदारी दिन में, पंचांग में दिए मुहूर्त में की जाती है। चूँकि समय शहर के अनुसार भिन्न होते हैं, अपने स्थान का पंचांग देखें। पंचांग कैसे पढ़ें और प्रवासी भारतीयों के लिए मुहूर्त देखें।
सामग्री
- लक्ष्मी, गणेश और कुबेर की प्रतिमाएँ या चित्र, और यदि हो तो धन्वंतरि का चित्र
- चौकी, लाल या पीला वस्त्र और जल, नारियल व पत्तों सहित कलश
- रोली, अक्षत, हल्दी, चंदन, पुष्प, माला और उपलब्ध हो तो कमल
- सोने या चाँदी की वस्तुएँ, सिक्के, नए बर्तन या जो भी आपने खरीदा
- दीये, घी या तेल, रुई की बत्तियाँ, धूप और कपूर
- अर्पण के लिए मिठाई, फल, बताशे, गुड़ और धनिये के बीज
- यम दीपम के लिए मिट्टी का दीया और थोड़ा तिल या सरसों का तेल
तैयार सूची हमारी लक्ष्मी-गणेश पूजा किट में है।
चरणबद्ध विधि
- सफ़ाई और सजावट: घर स्वच्छ करें, द्वार पर रंगोली और रोशनी लगाएँ, और पूजा स्थान तैयार करें।
- कुछ नया खरीदें: दिन के मुहूर्त में सोने या चाँदी की वस्तु, सिक्का, बर्तन या घर की कोई नई वस्तु खरीदें।
- चौकी सजाएँ: वस्त्र बिछाएँ, लक्ष्मी और गणेश जी को स्थापित करें, उनके पास कुबेर और धन्वंतरि को रखें, और कलश रखें। नई खरीदी वस्तुएँ सामने रखें।
- संकल्प: परिवार के स्वास्थ्य, समृद्धि और कल्याण के लिए पूजा का संकल्प लें।
- गणेश पूजन: गणेश जी से आरंभ करें, पुष्प, अक्षत और दीपक के साथ।
- धन्वंतरि पूजन: पुष्प, रोली और मिठाई अर्पित करें और परिवार के स्वास्थ्य की प्रार्थना करें। कुछ परिवार गुड़ और धनिये के बीज चढ़ाते हैं।
- लक्ष्मी और कुबेर पूजन: माला, पुष्प, चावल, मिठाई और सिक्के अर्पित करें। "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" का जप करें, और कुबेर मंत्र आता हो तो वह, अन्यथा श्रद्धा से नाम स्मरण करें। सोने, चाँदी और बर्तनों पर तिलक लगाएँ।
- आरती: लक्ष्मी और गणेश जी की आरती करें और प्रसाद बाँटें।
- यम दीपम: सूर्यास्त के बाद तिल या सरसों के तेल का मिट्टी का दीपक मुख्य द्वार के बाहर या प्रवेश पर दक्षिण मुख रखें। परिवार की सुरक्षा और दीर्घायु की प्रार्थना करें। उसे हवा और ज्वलनशील वस्तुओं से सुरक्षित रखें।
क्या खरीदें और किससे बचें
- वही खरीदें जो उपयोगी हो और आपकी क्षमता में हो। छोटा सिक्का या बर्तन पर्याप्त है।
- सोना, चाँदी, पीतल या स्टील की वस्तुएँ और घर की नई वस्तुएँ परंपरागत हैं।
- केवल इस दिन खरीदने के लिए कर्ज़ लेने से बचें।
- अनेक परिवारों की मान्यता के अनुसार इस दिन पैसे उधार न दें।
विदेश के परिवारों के लिए
- आप स्थानीय दुकान या ऑनलाइन से चाँदी का छोटा सिक्का, बर्तन या घर की कोई वस्तु खरीद सकते हैं।
- अपने शहर के सूर्यास्त और त्रयोदशी के समय का उपयोग करें। शाम की योजना बनाएँ, क्योंकि अनेक लोग उस दिन काम पर होते हैं।
- यम दीपम के लिए सुरक्षित दीप-आधार लें, या यदि लौ की अनुमति न हो तो बिजली का दीया। हमारी गाइड अपार्टमेंट में पूजा के लिए अग्नि सुरक्षा देखें।
मुख्य पर्व के लिए हमारी लक्ष्मी पूजा विधि पढ़ें, और व्यक्तिगत सहायता के लिए आचार्य से बात करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यदि मैंने कुछ नहीं खरीदा तो क्या पूजा कर सकता हूँ?
हाँ। खरीदना परंपरा है, शर्त नहीं। पूजा और प्रार्थना अधिक महत्वपूर्ण हैं।
यम का दीपक किस दिशा में रखें?
परंपरा से दक्षिण, यम की दिशा। इसे प्रवेश के बाहर सुरक्षित रूप से रखें।
क्या पंडित जी की आवश्यकता है?
नहीं। छोटी पूजा घर पर करना सरल है। मुहूर्त और मंत्रों में पंडित जी सहायक होते हैं।
लक्ष्मी पूजा की योजना बना रहे हैं?
अपने घर या व्यवसाय के लिए सही मुहूर्त और सत्यापित पंडित जी पाएँ।

