दिवाली की संध्या का लक्ष्मी पूजन पर्व की केंद्रीय उपासना है। परिवार माँ लक्ष्मी को, गणेश जी के साथ, स्वच्छ और प्रकाशित घर में आमंत्रित करता है, समृद्धि, कल्याण और सद्भाव की प्रार्थना के साथ। नीचे घर के लिए स्पष्ट, व्यावहारिक विधि है। पर्व की पृष्ठभूमि हमारी गाइड दिवाली, अर्थ और इतिहास में है।
मुख्य बातें
- पूजा कार्तिक अमावस्या की संध्या में, अपने शहर के लिए दिए गए प्रदोष काल के मुहूर्त में होती है।
- सदैव पहले गणेश जी की पूजा करें, फिर लक्ष्मी की। कुबेर, सरस्वती और कलश अक्सर शामिल होते हैं।
- सरल पूजा में 45 से 60 मिनट लगते हैं। स्थान और सामग्री दिन में पहले तैयार कर लें।
- व्यवसायी अपने खाते-बही के लिए चोपड़ा पूजन या शारदा पूजन भी कर सकते हैं।
कब करें
लक्ष्मी पूजन सूर्यास्त के बाद, सामान्यतः प्रदोष काल (संध्या के पहले कुछ घंटे) में, जब अमावस्या तिथि विद्यमान हो, किया जाता है, और कुछ पंडित उसी अवधि में स्थिर लग्न को भी प्राथमिकता देते हैं। चूँकि सूर्यास्त और तिथि का समय स्थान के अनुसार बदलता है, अपने शहर का पंचांग देखें। पंचांग कैसे पढ़ें देखें। विदेश के परिवार विदेश में दिवाली पूजा पढ़ सकते हैं।
सामग्री
- लाल या पीले वस्त्र वाली चौकी
- लक्ष्मी और गणेश जी की प्रतिमाएँ या चित्र, वैकल्पिक रूप से कुबेर और सरस्वती
- जल, नारियल, आम के पत्ते और कुछ सिक्के, सुपारी व चावल सहित कलश
- रोली, अक्षत (साबुत चावल), हल्दी, चंदन, कुमकुम
- पुष्प, माला और उपलब्ध हो तो कमल
- दीये, घी या तेल, रुई की बत्तियाँ और माचिस
- धूप, कपूर, घंटी, थाली और शंख
- सिक्के, चाँदी या सोने की वस्तु, चावल, खील, बताशे, मिठाई और फल
- पान के पत्ते और सुपारी, और देवताओं के लिए वस्त्र
हमारी लक्ष्मी-गणेश पूजा किट इन्हें सूची के रूप में एक साथ लाती है।
घर की तैयारी
- घर स्वच्छ करें और प्रवेश साफ़ रखें। द्वार पर रंगोली बनाएँ।
- रोशनी, पुष्प और तोरण से सजाएँ।
- पूजा के लिए स्वच्छ स्थान चुनें, आदर्श रूप से पूर्व या उत्तर मुख।
- चौकी सजाएँ, वस्त्र बिछाएँ और उस पर कुछ चावल रखें। कलश दाईं ओर या मध्य में रखें।
- गणेश जी को लक्ष्मी जी के दाईं ओर और अन्य को अपनी परंपरा के अनुसार रखें।
चरणबद्ध विधि
- स्नान और वस्त्र: स्वच्छ या नए वस्त्र पहनें। पूर्व या उत्तर मुख बैठें।
- दीप और धूप जलाएँ: घी का दीपक जलाएँ और क्षण भर मौन रहें।
- संकल्प: अपना नाम, गोत्र, स्थान और परिवार के कल्याण व समृद्धि के लिए लक्ष्मी-गणेश पूजन का उद्देश्य बोलें। हाथ में थोड़ा जल और चावल लें।
- गणेश पूजन: गणेश जी का आवाहन करें, पुष्प, रोली, अक्षत, दूर्वा और मिठाई अर्पित करें। "ॐ गं गणपतये नमः" का जप करें।
- कलश पूजन: कलश पर रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित करें, जो वरुण और पवित्र जल का प्रतीक है।
- लक्ष्मी आवाहन: लक्ष्मी का आवाहन करें, पुष्पों का आसन दें, प्रतीकात्मक रूप से जल से चरण धोएँ और वस्त्र अर्पित करें।
- लक्ष्मी पूजन: रोली, अक्षत, चंदन, पुष्प और माला अर्पित करें। सिक्के और धनतेरस पर खरीदी नई वस्तुएँ अर्पित करें। "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" का एक माला या कम से कम 108 बार जप करें, या आपको आता हो तो लक्ष्मी सहस्रनाम या श्री सूक्त का पाठ करें।
- कुबेर और सरस्वती (वैकल्पिक): धन के लिए कुबेर और ज्ञान के लिए सरस्वती का पुष्प और अक्षत से पूजन करें।
- नैवेद्य: मिठाई, खील, बताशे और फल का भोग लगाएँ।
- आरती: कपूर जलाएँ, घंटी बजाएँ और "ॐ जय लक्ष्मी माता" आरती गाएँ, फिर गणेश आरती। आरती की थाली देवताओं के सामने घुमाएँ और ज्योति सबको दें।
- प्रार्थना और प्रसाद: प्रणाम करें, किसी भी कमी के लिए क्षमा माँगें और प्रसाद बाँटें।
- दीपक: घर में, द्वार पर और बालकनी में दीये जलाएँ। देवताओं के पास एक दीपक जितना सुरक्षित रूप से संभव हो जलता रखें।
व्यवसाय के लिए चोपड़ा पूजन
व्यापारी और व्यवसायी अपने नए खाते-बही और औज़ारों की चोपड़ा या शारदा पूजन में पूजा करते हैं। बही पर रोली से स्वस्तिक बनाया जाता है, "शुभ लाभ" लिखा जाता है, और गणेश-लक्ष्मी के साथ उसका पूजन होता है। अनेक व्यवसाय इसी समय अपना लेखा वर्ष शुरू करते हैं।
नियमों पर सामान्य प्रश्न
- क्या द्वार खुला रखें? अनेक परिवार लक्ष्मी के स्वागत के लिए संध्या में मुख्य द्वार खुला और प्रकाशित रखते हैं। इसे सुरक्षित रूप से करें।
- कौन-से पुष्प? कमल और लाल पुष्प परंपरागत हैं। गेंदा और गुलाब भी ठीक हैं।
- क्या दिवाली पर उपहार लेना उचित है? परिवार और पड़ोसियों को मिठाई और उपहार देना एक रीति है।
- क्या पूजा अकेली महिला कर सकती है? हाँ। परिवार में कोई भी कर सकता है।
पूजा के बाद
परिवार के साथ भोजन करें, दीप जलाएँ और रिश्तेदारों व पड़ोसियों से मिलें। अगला दिन कुछ क्षेत्रों में गोवर्धन पूजा या नववर्ष होता है, फिर भाई दूज। यदि आप चाहते हैं कि पंडित जी पूजा करवाएँ, तो हमारा लक्ष्मी-गणेश पूजा पृष्ठ देखें, या परामर्श में आचार्य से बात करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या पंडित जी के बिना लक्ष्मी पूजा कर सकते हैं?
हाँ। अनेक परिवार करते हैं। मुहूर्त और मंत्रों में पंडित जी सहायक होते हैं।
यदि मुहूर्त चूक जाए तो?
प्रदोष समय के जितना निकट हो सके पूजा करें, और निकटतम उपयुक्त समय पंडित जी से पूछें।
पूजा के बाद सामग्री का क्या करें?
पुष्प नदी, पौधों या वृक्ष को अर्पित करें। प्रतिमा या चित्र घर के मंदिर में रखें। प्रसाद परिवार के साथ ग्रहण करें।
लक्ष्मी पूजा की योजना बना रहे हैं?
अपने घर या व्यवसाय के लिए सही मुहूर्त और सत्यापित पंडित जी पाएँ।

