घर पर नवरात्रि पूजा की रूपरेखा सरल है: पहले दिन सुबह कलश स्थापित करें, नौ दिन सुबह-शाम देवी की पूजा करें और कन्या पूजन तथा कृतज्ञता की प्रार्थना से पर्व का समापन करें। इस गाइड में पूरी विधि सरल चरणों में, मंत्रों और आरती करने के तरीके के साथ दी गई है, और विदेश में रहने वाले परिवारों के लिए सुझाव भी हैं। हर परिवार की परंपरा में थोड़ा अंतर होता है, जहाँ आपकी कुल परंपरा अधिक स्पष्ट हो, उसी का पालन करें।
मुख्य बातें
- नौ दिन घटस्थापना (कलश स्थापना) से शुरू होते हैं। कलश के पास जौ बोए जाते हैं और प्रतिदिन जल दिया जाता है।
- दैनिक पूजा छोटी होती है: दीपक, धूप, फूल, भोग, मंत्र या पाठ और आरती। यह सुबह और शाम दोनों समय की जाती है।
- अखंड ज्योति (नौ दिन जलने वाला दीपक), पूर्ण व्रत और दुर्गा सप्तशती, ये सब वैकल्पिक हैं और परिवार की परंपरा तथा स्वास्थ्य पर निर्भर करते हैं।
- पूरी पूजा आप स्वयं कर सकते हैं। संकल्प, हवन या सप्तशती पाठ में पंडित जी सहायक होते हैं।
नवरात्रि पूजा की सामग्री
- तांबे, पीतल या मिट्टी का कलश, और जौ बोने के लिए चौड़ा मिट्टी का पात्र या थाली
- स्वच्छ मिट्टी और जौ
- स्वच्छ जल, यदि हो तो थोड़ा गंगाजल
- पाँच या सात आम के पत्ते और जटा वाला नारियल
- लाल वस्त्र, मौली (कलावा), रोली या कुमकुम, अक्षत, सुपारी और सिक्का
- फूल (देवी को लाल गुड़हल परंपरागत रूप से चढ़ाया जाता है) और माला
- दुर्गा जी की मूर्ति, चित्र या यंत्र, और कपड़ा बिछी चौकी या आसन
- घी का दीपक, धूप, कपूर, फल और भोग के लिए मिठाई
हमारी दुर्गा सप्तशती सामग्री किट और कन्या पूजन किट में इनमें से अधिकांश वस्तुएँ मिल जाती हैं। विदेश में रहने वाले परिवार विकल्प अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा की सामग्री गाइड में देख सकते हैं।
शुरू करने से पहले
- एक दिन पहले घर और पूजा स्थान की सफाई कर लें। उत्तर-पूर्व का कोना सामान्यतः चुना जाता है और पूजा में पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठते हैं।
- पहले दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- अपने शहर का मुहूर्त पक्का कर लें। देखें नवरात्रि 2026 की तिथि और घटस्थापना मुहूर्त।
घटस्थापना (कलश स्थापना) की चरण दर चरण विधि
- संकल्प। पूजा स्थान पर बैठकर दाहिने हाथ में जल, अक्षत और फूल लें। अपना नाम, स्थान, तिथि और नौ दिनों का उद्देश्य, जैसे परिवार का कल्याण, बोलें। संस्कृत संकल्प न आता हो तो अपने शब्दों में श्रद्धा से बोलें।
- गणेश जी का स्मरण। विघ्नहरण के लिए गणेश जी की छोटी प्रार्थना से आरंभ करें। दीपक और धूप जलाएँ।
- जौ की क्यारी बनाएँ। चौड़े पात्र में स्वच्छ मिट्टी की परत बिछाएँ, जौ बोएँ और थोड़ा जल छिड़कें।
- कलश तैयार करें। कलश में स्वच्छ जल भरें, उसमें थोड़ा गंगाजल, सुपारी, सिक्का और कुछ अक्षत डालें। गले में मौली बाँधें और रोली लगाएँ।
- पत्ते और नारियल रखें। कलश के मुख पर आम के पत्ते सजाएँ। नारियल को लाल वस्त्र में लपेटकर मौली से बाँधें और ऊपर रखें।
- कलश स्थापित करें। कलश को जौ की क्यारी के ऊपर या उसके पास स्थिर रखें। हाथ जोड़कर माँ दुर्गा और देवताओं का कलश में आवाहन करें।
- पूजन। रोली, अक्षत, फूल और माला अर्पित करें, फिर दीपक, धूप, भोग और अंत में आरती करें।
दुर्गा जी की मूर्ति या चित्र कलश के पास रखें। कई परिवार अखंड ज्योति भी जलाते हैं। यह निजी निर्णय है और इसमें सावधानी ज़रूरी है, इसे कभी अकेला न छोड़ें, और विदेश में अपार्टमेंट में रहते हों तो पहले हमारी अग्नि सुरक्षा गाइड पढ़ लें।
नौ दिनों की दैनिक पूजा
दैनिक पूजा छोटी और नियमित रखी जा सकती है। सुबह और शाम यह करें:
- हाथ धोकर पूजा स्थान पर बैठें, दीपक और धूप जलाएँ।
- कलश और देवी को ताज़े फूल और थोड़ा जल अर्पित करें।
- प्रार्थना के साथ भोग, यानी फल या मिठाई, अर्पित करें।
- कोई मंत्र जपें, दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें, या बस प्रार्थना में बैठें।
- आरती करें और प्रसाद परिवार में बाँटें।
दिन में एक बार जौ पर थोड़ा जल छिड़कें और उन्हें कड़ी धूप से बचाएँ। नौ दिन में उगने वाले हरे अंकुरों को जवारे कहते हैं और उन्हें प्रसाद के रूप में रखा जाता है। हर दिन आप उस दिन पूजे जाने वाले दुर्गा रूप का स्मरण कर सकते हैं, शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक। हमारी गाइड दुर्गा के नौ रूप में सूची है।
जपने योग्य मंत्र
मंत्र शांत दैनिक साधना के रूप में जपे जाते हैं। जितनी बार सहज लगे उतनी बार जपें। माला से 108 बार जपना एक प्रचलित तरीका है।
- नवार्ण मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। दुर्गा का पारंपरिक मंत्र, जो नवरात्रि में बहुत जपा जाता है।
- देवी माहात्म्य का स्तुति श्लोक: सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥ इसका भाव है: हे मंगलों की भी मंगल, कल्याणकारी, सब कार्य सिद्ध करने वाली, शरण देने वाली, त्रिनेत्रा गौरी, नारायणी, आपको नमस्कार।
- दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य): 13 अध्यायों में 700 श्लोकों का ग्रंथ। कई परिवार इसे नौ दिनों में पढ़ते हैं और कुछ पंडित जी के साथ पाठ करवाते हैं। देखें हमारा दुर्गा सप्तशती पाठ।
उच्चारण महत्वपूर्ण है, इसलिए किसी मंत्र के उच्चारण में संदेह हो तो शुरू करने से पहले किसी योग्य गुरु से सुन लें या पंडित जी से पूछ लें, और धीरे-धीरे जपें।
आरती कैसे करें
आरती हर पूजा का समापन है, देवता को प्रेम से दीप अर्पित करने का तरीका। नवरात्रि में बहुत से लोग आरती का पाठ खोजते हैं। घरों और मंदिरों में देवी की सबसे अधिक गाई जाने वाली आरती "जय अम्बे गौरी" है, और दुर्गा चालीसा भी प्रचलित है। हम यहाँ आरती का पाठ नहीं छाप रहे। अपने परिवार की आरती की पुस्तक या अपने मंदिर में गाया जाने वाला संस्करण उपयोग करें, क्योंकि पंक्तियाँ क्षेत्र के अनुसार भिन्न होती हैं। महत्वपूर्ण यह है कि आरती कैसे अर्पित की जाए:
- घी का दीपक, या थाली में कपूर जलाएँ। पास में घंटी रखें।
- देवी के सामने खड़े होकर धीरे से घंटी बजाएँ और परिवार के साथ आरती गाना शुरू करें।
- थाली को देवता के सामने धीरे-धीरे दक्षिणावर्त, यानी घड़ी की दिशा में घुमाएँ। प्रचलित विधि है चरणों पर चार बार, नाभि पर दो बार, मुख पर एक बार और पूरे स्वरूप पर सात बार।
- आरती पूर्ण होने पर थाली के चारों ओर थोड़ा जल घुमाएँ और सब लोग दोनों हथेलियों से ज्योति की ऊष्मा लेकर आँखों और मस्तक से लगाएँ।
- प्रसाद बाँटें।
नवरात्रि में व्रत
व्रत निजी निर्णय है और नियम क्षेत्र तथा परिवार के अनुसार अलग हैं। बहुत से लोग नौ दिन अनाज, प्याज, लहसुन और मांसाहार से दूर रहते हैं तथा फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू और सेंधा नमक वाला भोजन करते हैं। कुछ लोग नौ दिन व्रत रखते हैं, कुछ केवल पहले और अंतिम दिन, और कुछ व्रत न रखकर सादा सात्त्विक भोजन करते हैं। यदि आप अस्वस्थ, वृद्ध, गर्भवती हैं या दवा ले रहे हैं तो चिकित्सकीय सलाह के विरुद्ध व्रत न रखें। श्रद्धा कठोरता से अधिक महत्वपूर्ण है।
अष्टमी, नवमी और कन्या पूजन
अष्टमी या नवमी को बहुत से परिवार नौ कन्याओं और कभी-कभी एक छोटे बालक को आमंत्रित करते हैं, उनके चरण धोते हैं, तिलक लगाते हैं, पूरी, चना और हलवे का भोजन कराते हैं और छोटे उपहार देते हैं। इसे कन्या पूजन कहते हैं। अधिक जानकारी हमारे कन्या पूजन पेज पर है। कुछ परिवार नवमी को छोटा हवन भी करते हैं।
नौ दिनों का समापन
नवमी या दशमी को अंतिम पूजा और आरती करें और नौ दिनों के लिए देवी का धन्यवाद करें। फिर प्रार्थना के साथ कलश का समापन किया जाता है। कलश के जल को घर में छिड़का जाता है और जवारे प्रसाद के रूप में रखे जाते हैं या कुल परंपरा के अनुसार किसी पौधे में या बहते जल में आदरपूर्वक रखे जाते हैं। दसवें दिन विजयादशमी आती है। देखें विजयादशमी पूजा विधि।
इन गलतियों से बचें
- सामग्री सुबह के समय ही जुटाना। एक दिन पहले तैयारी कर लें।
- अस्थिर कलश रखना। उसे मज़बूत आधार पर रखें ताकि वह झुके नहीं।
- दीपक, विशेषकर अखंड ज्योति, को अकेला छोड़ना।
- कठोर व्रत को ही भक्ति का पैमाना मानना, या स्वास्थ्य सलाह के विरुद्ध व्रत रखना।
- जिस मंत्र का उच्चारण न आता हो, उसे बिना सीखे जपना।
विदेश में रहने वाले परिवारों के लिए
अपने शहर और टाइम ज़ोन का मुहूर्त देखें। जो वस्तुएँ न मिलें उनके विकल्प प्रयोग करें, अपनी इमारत के अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन करें और जहाँ खुली लौ की अनुमति न हो वहाँ बिजली या छोटे दीपक का उपयोग करें। यदि आप चाहते हैं कि पंडित जी संकल्प में मार्गदर्शन करें या वीडियो पर पाठ करवाएँ, तो पढ़ें ऑनलाइन पूजा कैसे होती है या देखें प्रवासी भारतीयों के लिए पंडित सेवाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या नवरात्रि में अखंड ज्योति अनिवार्य है?
नहीं। यह पारिवारिक परंपरा है, अनिवार्यता नहीं। अधिकांश घरों के लिए सुबह-शाम की पूजा में जलाया गया दीपक पर्याप्त है।
क्या बिना पंडित जी के घर पर नवरात्रि पूजा हो सकती है?
हाँ। श्रद्धा से की गई सरल पूजा मान्य है। संकल्प, हवन या सप्तशती पाठ में पंडित जी की सहायता लें।
क्या नौ दिन व्रत रखना ज़रूरी है?
नहीं। व्रत निजी निर्णय है और परंपरा के अनुसार बदलता है। अपने स्वास्थ्य और कुल रीति के अनुसार करें।
घटस्थापना का मुहूर्त निकल जाए तो क्या करें?
कई पंडित अभिजीत मुहूर्त को विकल्प बताते हैं। रात में यह परंपरागत रूप से नहीं की जाती। अपनी स्थिति के अनुसार पंडित जी से पूछ लें।
नवरात्रि में कौन सी आरती गाई जाती है?
अधिकांश परिवार "जय अम्बे गौरी" आरती गाते हैं और कई दुर्गा चालीसा भी पढ़ते हैं। अपने परिवार या मंदिर का संस्करण उपयोग करें।
व्यक्तिगत मार्गदर्शन चाहिए?
सत्यापित आचार्य से बात करें, या सत्यापित पंडित जी के साथ अपने संस्कार की योजना बनाएँ।

